//@@// चाहे जितनी मर्जी हो उपलब्धियाँ, लेकिन अनुशासन से समझौता नही होना चाहिये।
यह बात बतौर अध्यक्ष सौरव गाँगुली और प्रशिक्षक राहुल द्रविड़ के नेतृत्व वाली भारतीय क्रिकेट कँट्रोल बोर्ड (BCCI) पर खरी है।
क्रिकेट....सामुहिक टीम गेम है और उस टीम गेम का नेतृत्व उस खिलाड़ी के जिम्मे होना चाहिये जिसमे टीम स्प्रिट के गुण हो।
जिसमे दक्षता के साथ सम्पूर्ण टीम एवँ टीम मैनेजमेंट को एक सूत्र में बाँधकर आगे ले जाने की क्षमता हो। एक दिवशीय एवँ टी-20 प्रारुप के भारतीय टीम के निवृतमान कैप्टन श्री विराट कोहली को लेकर भारतीय क्रिकेट कन्ट्रोल बोर्ड का निर्णय सटीक एवँ समयक है।
विगत काफी समय से मीडिया में आ रही खबरो से ज्ञात हो रहा था कि श्री विराट कोहली के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट टीम के भीतर खाने सबकुछ ठीक नही चल रहा था। टीम के भीतर खिलाड़ियों में परस्पर में सामँजस्यता की कमी थी।
टीम के भीतर सामँजस्य और खेल अनुकूल वातावरण हेतु एक और एक मात्र टीम के कप्तान की भूमिका होती है। जो श्री विराट कोहली के नेतृत्व में नही झलक रहा था।
एक खिलाड़ी के नाते श्री कोहली का योगदान अभूतपूर्व है। लेकिन इसका अर्थ यह नही है कि योगदान के एवज में अनुशासन से समझौता किया जाय।
श्री विराट कोहली को उनके योगदान के अनुरुप भारतीय क्रिकेट टीम जैसी महान टीम का नेतृत्व करने का पर्याप्त अवसर प्राप्त हुआ है।
अब यह उचित समय है जब नये नेतृत्व के अधीन टीम को आगे ले जाया जाय।
श्री विराट कोहली के व्दारा पिछले दिनो क्रिकेट बोर्ड के नेतृत्वकर्ता के विरुध्द सार्वजनिक रुप से खड़े किये गये प्रश्न सर्वथा अनुचित है। यह आचरण दर्शाता है कि उनमे खेल भावना की कमी है। जिसमे स्वयँ खेल भावना नही है वह व्यक्ति कैसे टीम में एकता और सामँजस्य बना सकता है ।
समय की आवश्यकता है कि श्री रोहित शर्मा के नेतृत्व के साथ देश खड़ा हो और भविष्य में भी अगर निवृत्तमान कैप्टन श्री विराट कोहली की भूमिका असहयोगात्मक और अनुशासन के प्रतिकूल हो तो बोर्ड को चाहिये कि बगैर समय गवाये ऐसे खिलाड़ी को बर्खास्त कर दिया जाय ताकि भविष्य के लिये दृष्टाँत स्थापित हो कि कोई स्टार हो तो अपने घर का है....देश...देश की टीम... देश के बोर्ड और सँस्थान के अनुशासन से बढ़कर कोई नही है।

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