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    कैसे अकेली आदिवासी महिला ने बनाया बाँध
    कैसे अकेली आदिवासी महिला ने बनाया बाँध

    कैसे अकेली आदिवासी महिला ने बनाया बाँध- जमीन होने के बावजूद सँसाधनो की कमी और गरीबी और अभाव का दुखड़ा रोनेवालो के लिये बुजुर्ग आदिवासी महिला ने आँखे खोलनेवाला दृष्टाँत प्रस्तुत किया है।
    आन्ध्रप्रदेश की 75 वर्षीय बूढ़ी आदिवासी महिला ने अपने प्रयासों से गाँव में चेक डैम (बाँध) बना डाला है।
    वो पहाड़ी नाला जिस पर अकेली आदिवासी महिला ने बनाया बाँध
    वो पहाड़ी नाला जिस पर अकेली आदिवासी महिला ने बनाया बाँध

    समाज के लिये उदाहरण प्रस्तुत करनेवाली बूढ़ी आदिवासी महिला का नाम चिन्नालम्मा हैं।
    कहाँ की निवासी है
    वो आन्ध्रप्रदेश के अल्लुरी सीताराम राजू जिले के केमेदुपल्ली गाँव की निवासी है।
    कृषि की गहरी समझ रखनेवाली चिन्नालम्मा गाँव में मौजूद पहाड़ी नाले के जल का उपयोग करने की ठानी थी।
    कैसे अनपढ़ आदिवासी इंजिनियर  महिला ने बनाया बाँध
     
    विशेषकर बरसात के समय अतिरिक्त जल को बेकार जाने से रोकने हेतु चेक डैम की कल्पना की थी।
    कैसे किया धन सँग्रह
    अपने बनाये डैम पर कड़ी आदिवासी महिला
    कैसे अकेली आदिवासी महिला ने बनाया बाँध

    चेट डैम के निर्माण हेतु आवश्यक धन हेतु उन्होने अपने सँचीत धन के साथ गाँववालों से आर्थिक सहयोग लिया।
    आज बुजुर्ग महिला व्दारा निर्मित बाँध से लगभग 100 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई सँभव हो रहा है।

    FAQ

    Q1 माईक्रो वाटर मैनेजमेंट का दृष्टाँत ?
    A1 चिन्नालम्मा का अनुकरणीय कार्य माईक्रो वाटर मैनेजमेंट की दिशा में उल्लेखनीय पहल है।

    Q2 बूढ़ी चिन्नालम्मा को लोग किस नाम से पुकारते है?
    A2 इलाके के लोग बुजुर्ग चिन्नालम्मा को सम्मानपूर्वक इँजीनियर चिन्नालम्मा के नाम से पुकारते हैं।
    Q3 क्या चिन्नालम्मा के कार्य को दिशा देने में आन्ध्रप्रदेश सरकार को सहयोग करना चाहिये ?
    A3 बुजुर्ग चिन्नालम्मा के परिकल्पना के हिसाब से चेक डैम का कुछ कार्य शेष है।
    जिसके लिये धन की आवश्यकता है।
    ऐसे में आन्ध्रप्रदेश की सरकार को चाहिये की वह आर्थिक मदद प्रदान कर कार्य को पूर्ण कराये एवँ चिन्नालम्मा के कार्यो को बतौर माडल अन्यत्र गाँवो में प्रस्तुत करे।