//@@// अन्तिम दफे समरकँद में दिखे थे। जहाँ से भारतीय प्रधानमँत्री नरेंद्र मोदी से लताड़ खाकर देश लौटने के बाद से ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अन्तर्ध्यान है।
दुनियाँ भर में सँभावनाओ का बाजार गर्म है।
कोई कहता चीन में तख्ता पलट हो गया है।
कोई चीनी राष्ट्रपति को नजरबँद किये जाने की बात कर रहा है।
तो एक वर्ग एक कदम आगे जाकर शी जिनपिंग की वहाँ की सेना PLA व्दारा हत्या किये जाने की बात कर रही है।
इस विषय पर मेरा मानना है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सुरक्षित होंगे और एकाएक दुनियाँ की नजर से अन्तर्ध्यान होना उनकी चाल है।
दरअसल आगामी माह अक्टूबर के मध्य में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की पँच वर्षीय काँग्रेस(सम्मेलन) होना प्रस्तावित है।
जहाँ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपनी महत्वाकाँक्षी योजना को अमलीजामा पहनायेंगे।
उक्त योजना के तहत शी जिनपिंग बतौर राष्ट्रपति, स्वयँ को आजीवन के लिये नियुक्त कराने हेतु प्रस्ताव काँग्रेस में पारित करवाने की योजना है।।
इसकी तैयारी शी जिनपिंग की ओर से पिछले कुछ वर्षो से चल रही है।
इस कड़ी में वर्ष 2019 में उन्होने राष्ट्रपति के दो कार्यकाल के सीलिंग को हटाया था।
शी जिनपिंग की महत्वाकाँक्षी योजना ने उनके विरोधियो को सतर्क कर दिया था।
शी जिनपिंग एक क्रूर तानाशाह है,जो किसी भी रुप गद्दी से चिपके रहना चाहता है।
इस हेतु पिछले कुछ वर्षो से अपने विरोधियो को मौत के घाट उतारता रहा है।
कहते है पिछले कुछ वर्षो में शी जिनपिंग ने एक लाख से भी अधिक विरोधियों को मौत के घाट उतरवाया है।
विरोधियों को ठिकाने लगाने हेतु चीन में सबसे बढ़िया मुद्दा है ....भ्रष्टाचार ..!
जो नापसँद है...उस पर भ्रष्टाचार का आरोप मढ़ो और फिर त्वरित न्याय करते हुये सजा ए मौत...!
अभी चँद रोज पहले ही शी जिनपिंग ने चीनी सेना के त्तीन वरिष्ठ जनरलो को भ्रष्टाचार का आरोप मढ़कर मौत के घाट उतारा है।
शी जिनपिंग भली प्रकार जानता है कि उसके आजीवन राष्ट्रपति बनने को लेकर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से लेकर सेना के भीतर विरोधी है।
जिनसे शी जिनपिंग आशँकित है और चाहता है कि उसकी महत्वाकाँक्षी योजना के अमलीजामा पहनाने में किसी प्रकार का विरोध न रहे।
जो विरोधी विगत वर्षो में एक्सपोज हुये है,उन्हे तो भ्रष्टाचार या फिर सत्ता के विरुद्ध षड़यँत्र रचने का मनगढ़ँत आरोप मढ़कर मौत देता रहा है।
लेकिन उन विरोधियों का क्या, जो पार्टी और सेना के भीतर छुपे हुये है। जिन्हे इँतजार है उचित अवसर का कि जब वे शी जिनपिंग के विरुध्द पलटवार कर सके।
वर्तमान में शी जिनपिंग के गायब होने की घटना के पीछे का कारण स्वरुप यही अदृश्य विरोधी शक्तियों के होने से इँकार नही किया जा सकता है।
चीनी राष्ट्रपति का गायब होना एक चाल हो सकती है।
जिसे चलकर शी जिनपिंग अपने छुपे हुये विरोधियों और दुश्मनो की पहचान करना चाह रहे हो..!
सत्ता के लिये शी जिनपिंग किसी हद तक जा सकते है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग कि स्वयँ को गायब होने या फिर नजरबँद होने या फिर हत्या हो जाने की बात फैलाकर विरोधियों को चारा डालने की योजना हो सकती है।
ताकि वर्षो से उचित अवसर की बाँटजोह रहे विरोधी खेमे के दुश्मन असतर्क होकर कुछ ऐसी गलती कर दे जो शी जिनपिंग को पहचान करने हेतु सहायक बन जाये..!
इस सँभावना में इस लिये भी दम है, क्योंकि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की पाँच वर्षो के अँतराल में आयोजित होनेवाले पार्टी काँग्रेस के आयोजन का समय करीब आ रहा हैं।
ऐसे में एक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का खेमा है , जो आजीवन राष्ट्रपति बनने की मँशा रखते है।
तो वही उनके कुटिल मँशा को विफल करने में सक्रिय विरोधी खेमा है।
वर्तमान में दोनो खेमो में शहमात का खेल चल रहा है।
दोनो खेमो पर दबाव है कि वें अपनी अपनी योजना को शीघ्र फाईनल टच दें।
सँभवत: शी जिनपिंग ने इसी सोच के साथ तख्तापलट की अफवाह उड़वाई है ताकि छुपे दुश्मनो को असतर्क कर सके।
इस उम्मीद से कि विरोधी दुश्मन तख्तापलट के झाँसे में फँसकर कुछ ऐसी गलती कर बैठे की उनकी पहचान एक्सपोज हो जाय और इसके ताड़ में बैठे शी जिनपिंग के लिये पहचान करना आसान हो जाय, ताकि वे आसन्न कम्युनिस्ट पार्टी के काँग्रेस से पूर्व अपनी राह को निर्विघन कर सके।
दुनियाँ भर में सँभावनाओ का बाजार गर्म है।
कोई कहता चीन में तख्ता पलट हो गया है।
कोई चीनी राष्ट्रपति को नजरबँद किये जाने की बात कर रहा है।
तो एक वर्ग एक कदम आगे जाकर शी जिनपिंग की वहाँ की सेना PLA व्दारा हत्या किये जाने की बात कर रही है।
इस विषय पर मेरा मानना है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सुरक्षित होंगे और एकाएक दुनियाँ की नजर से अन्तर्ध्यान होना उनकी चाल है।
दरअसल आगामी माह अक्टूबर के मध्य में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की पँच वर्षीय काँग्रेस(सम्मेलन) होना प्रस्तावित है।
जहाँ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपनी महत्वाकाँक्षी योजना को अमलीजामा पहनायेंगे।
उक्त योजना के तहत शी जिनपिंग बतौर राष्ट्रपति, स्वयँ को आजीवन के लिये नियुक्त कराने हेतु प्रस्ताव काँग्रेस में पारित करवाने की योजना है।।
इसकी तैयारी शी जिनपिंग की ओर से पिछले कुछ वर्षो से चल रही है।
इस कड़ी में वर्ष 2019 में उन्होने राष्ट्रपति के दो कार्यकाल के सीलिंग को हटाया था।
शी जिनपिंग की महत्वाकाँक्षी योजना ने उनके विरोधियो को सतर्क कर दिया था।
शी जिनपिंग एक क्रूर तानाशाह है,जो किसी भी रुप गद्दी से चिपके रहना चाहता है।
इस हेतु पिछले कुछ वर्षो से अपने विरोधियो को मौत के घाट उतारता रहा है।
कहते है पिछले कुछ वर्षो में शी जिनपिंग ने एक लाख से भी अधिक विरोधियों को मौत के घाट उतरवाया है।
विरोधियों को ठिकाने लगाने हेतु चीन में सबसे बढ़िया मुद्दा है ....भ्रष्टाचार ..!
जो नापसँद है...उस पर भ्रष्टाचार का आरोप मढ़ो और फिर त्वरित न्याय करते हुये सजा ए मौत...!
अभी चँद रोज पहले ही शी जिनपिंग ने चीनी सेना के त्तीन वरिष्ठ जनरलो को भ्रष्टाचार का आरोप मढ़कर मौत के घाट उतारा है।
शी जिनपिंग भली प्रकार जानता है कि उसके आजीवन राष्ट्रपति बनने को लेकर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से लेकर सेना के भीतर विरोधी है।
जिनसे शी जिनपिंग आशँकित है और चाहता है कि उसकी महत्वाकाँक्षी योजना के अमलीजामा पहनाने में किसी प्रकार का विरोध न रहे।
जो विरोधी विगत वर्षो में एक्सपोज हुये है,उन्हे तो भ्रष्टाचार या फिर सत्ता के विरुद्ध षड़यँत्र रचने का मनगढ़ँत आरोप मढ़कर मौत देता रहा है।
लेकिन उन विरोधियों का क्या, जो पार्टी और सेना के भीतर छुपे हुये है। जिन्हे इँतजार है उचित अवसर का कि जब वे शी जिनपिंग के विरुध्द पलटवार कर सके।
वर्तमान में शी जिनपिंग के गायब होने की घटना के पीछे का कारण स्वरुप यही अदृश्य विरोधी शक्तियों के होने से इँकार नही किया जा सकता है।
चीनी राष्ट्रपति का गायब होना एक चाल हो सकती है।
जिसे चलकर शी जिनपिंग अपने छुपे हुये विरोधियों और दुश्मनो की पहचान करना चाह रहे हो..!
सत्ता के लिये शी जिनपिंग किसी हद तक जा सकते है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग कि स्वयँ को गायब होने या फिर नजरबँद होने या फिर हत्या हो जाने की बात फैलाकर विरोधियों को चारा डालने की योजना हो सकती है।
ताकि वर्षो से उचित अवसर की बाँटजोह रहे विरोधी खेमे के दुश्मन असतर्क होकर कुछ ऐसी गलती कर दे जो शी जिनपिंग को पहचान करने हेतु सहायक बन जाये..!
इस सँभावना में इस लिये भी दम है, क्योंकि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की पाँच वर्षो के अँतराल में आयोजित होनेवाले पार्टी काँग्रेस के आयोजन का समय करीब आ रहा हैं।
ऐसे में एक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का खेमा है , जो आजीवन राष्ट्रपति बनने की मँशा रखते है।
तो वही उनके कुटिल मँशा को विफल करने में सक्रिय विरोधी खेमा है।
वर्तमान में दोनो खेमो में शहमात का खेल चल रहा है।
दोनो खेमो पर दबाव है कि वें अपनी अपनी योजना को शीघ्र फाईनल टच दें।
सँभवत: शी जिनपिंग ने इसी सोच के साथ तख्तापलट की अफवाह उड़वाई है ताकि छुपे दुश्मनो को असतर्क कर सके।
इस उम्मीद से कि विरोधी दुश्मन तख्तापलट के झाँसे में फँसकर कुछ ऐसी गलती कर बैठे की उनकी पहचान एक्सपोज हो जाय और इसके ताड़ में बैठे शी जिनपिंग के लिये पहचान करना आसान हो जाय, ताकि वे आसन्न कम्युनिस्ट पार्टी के काँग्रेस से पूर्व अपनी राह को निर्विघन कर सके।

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