पानी ने कम और पाकी हुक्मरानो और चीन ने ज्यादा डूबोया पाकिस्तान को
Why and how devastating flood occurred in Pakistan in hindi- लोग लम्बे समय से सैलाब के पानी में खड़े रहने हेतु विवश है। लेकिन विडँबना कहा जाय कि तन बदन गिला है लेकिन हलक सूखा है।
साफ शुध्द पेयजल के अभाव में करोड़ो लोग प्यासे खड़े रहने पर विवश है।
लाचारी के दलदल में धँसे पाकिस्तान की कुछ ऐसी ही तस्वीर है।
पाकिस्तान अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। भूख और प्यास से बेहाल..!
डावाडोल आर्थिक स्थिति और अस्थिर राजनीतिक परिदृश्य जैसे कारणो से पहले से ही जूझ रहे पाकिस्तान पर मानसून का कहर सैलाब बनकर टूट पड़ा है।
साफ शुध्द पेयजल के अभाव में करोड़ो लोग प्यासे खड़े रहने पर विवश है।
लाचारी के दलदल में धँसे पाकिस्तान की कुछ ऐसी ही तस्वीर है।
पाकिस्तान अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। भूख और प्यास से बेहाल..!
डावाडोल आर्थिक स्थिति और अस्थिर राजनीतिक परिदृश्य जैसे कारणो से पहले से ही जूझ रहे पाकिस्तान पर मानसून का कहर सैलाब बनकर टूट पड़ा है।
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| Why and how devastating flood in Pakistan in hindi |
लम्बे समय से पाकिस्तान का दक्षिण पँजाब गिलगित बाल्टीस्तान , आजाद कश्मीर, बलूचिस्तान, सिंध आदि सुबो पर मानसून नही बल्कि कहर बरस पड़ा है।
पाकिस्तान के निचला सूबा सिंध तो एक प्रकार से झील में तब्दील हो चुका है।
जो लम्बे समय से सैलाब के पानी में डूबा हुआ है।
क्या कारण है जो पाकिस्तान भयँकर जल सैलाब की जद में है ?
यूँ तो नदियो के देश पाकिस्तान में मानसून के सीजन में बाढ़ आना कोई नई बात नही है। लेकिन इस बार का मानसून और उसके कारण निर्मित हुई जल सैलाब की स्थिति अभूतपूर्व है।ऐसा सामान्य मौसम चक्र के कारण न होकर ग्लोबल वार्मिंग की वजह से है।
इस वर्ष युरोप और उत्तरी एशिया जबदस्त सूखे की चपेट में है। जहाँ के जल स्त्रोत सूखने की कगार तक पहुँच चुके है।
ऐसे में रुस और चीन से बहनेवाली शुष्क गरम हवाओ का प्रभाव पाकिस्तानी क्षेत्र के हिन्दुकुश और हिमालयीन पर्वत श्रँखलाओ में स्थित ग्लैशियरो पर पड़ा है।
ग्लैशियर में तेजी से पिघलनेवाली बर्फ और वाष्पन के कारण अतिवृष्टि
पाकिस्तान गाँवो में बसनेवाला देश है। लगभग 70% प्रतिशत जनता सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था से ताल्लुक रखती है।
जिसका कृषि और पशुपालन जैसे कार्य मुख्य पेशा है।
ऐसे में विगत लम्बे समय से बाढ़ के पानी में डूबे होने के कारण पाकिस्तान में हालात क्या होंगे सहज कल्पना की जा सकती है।
क्योंकि बाढ़ से सर्वाधिक ग्रामीण अँचल प्रभावित हुये है।
अबतक हजारो लोग मारे जा चुके है।
लाखो एकड़ कृषि भूमि पर खड़ी फसल बर्बाद हो गई है। लाखो की तादाद में पशु सैलाब की चपेट में आकर खत्म हो चुकी है। लोगो के आशियाने उजड़ चुके है।
सर पर छत विहीन लोग कई हफ्तो से पानी में खड़े होने पर विवश है।
स्थिति की विकटता है कि सैलाब प्रभावित लोगो के तन बदन भीगे है परन्तु हलक सुखे हुये है। लोगो के पास साफ पीने का पानी नही है।
पाकिस्तान की लाईफ लाईन बनी लाईन आफ डेथ
जो सिंधु नदी व उसकी सहायक नदियाँ पाकिस्तान की लाईफ लाईन थी।वही दरिया इस दफे लाईन आफ डेथ में परिणीत हो गई है।
पाकिस्तान पर काल बन कर टूट पड़ी है।
रौद्र रुप धरे लाईफ लाईन ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है।
सैलाब के कारण पाकिस्तान की पचहत्तर वर्षो की अकर्मण्यता, अदूरदर्शी और भ्रष्ट शासन व्यवस्थाओ को एक एक्सपोज हुआ है।
पश्चिमी देशो की रिपोर्ट दर्शाती है कि इस दफे अन्य वर्षो की तुलना में पाकिस्तान में मानसून का प्रभाव अब तक दस गुणा अधिक रहा है।
मौसम विज्ञानियो के अनुमान से अभी अँत नही है और आनेवाले समय में वर्षा की सँभावना से इँकार नही किया जा सकता है।
अगर ऐसा होता है तो वर्तमान में व्याप्त जमीनी परिस्थितियों को और विकट बनायेगा।
जिन दरियाओ पर पाकिस्तान को नाज था। आज वही दरिया पाकिस्तान के आँसुओ का कारण बन गई है।
ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभावो से निपटने में दुनियाँ के उन्नत देश और समृध्द अर्थव्यवस्थाओ को कुछ नही सूझ रहा है।
यहाँ तो चर्चा के केन्द्र में पाकिस्तान है। जिसे तीसरी दुनियाँ में भी तीसरी दुनियाँ के देश की आख्या दी जाय तो अनुचित नही होगा।
जहाँ न व्यवस्था है और नियत। देश की एक नीति जो स्पष्ठ है वह है छल और कपट।
यह कारण है कि प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे पाकिस्तान के लिये दुनियाँ के देश सहायता के नाम पर बँद किये हुये है कपाट..!
प्यास और भूखमरी की स्थिति से गुजर रहे पाकिस्तान का भविष्य अच्छा है कहना उचित नही होगा।
कभी न कभी तो बारिश भी थमेगी। अपने तट बन्धनो को तोड़कर गाँवो,खेत खलिहानो में ताण्डव मचा रहे दरिया शाँत होगी।
उसके बावजूद पाकिस्तान के समक्ष चुनौतियाँ कम होने के बजाय बढ़ने की सँभावना है।
सैलाब का पानी उतरने के साथ साथ पाकिस्तान के समक्ष नई चुनौती पेश होंगी।
जहाँ साँप,बिच्छुओं जैसे भयँकर जन्तुओ के प्रकोप में वृध्दि होगी।
वही दूसरी ओर जल जनीत रोगो जैसे मलेरिया, डेंगू, डायरिया, त्वचा रोगो के साथ ही श्वसन रोगो की सँभावना मँडरायेगी।
इस स्थिति की आहट मिलने भी लगी है। पिछले दिनो पाकिस्तान के किसी मीडिया में चल रहे डिबेट के दौरान ऐसा आभास मिला है।
उक्त डिबेट में हिस्सा ले रहे कतिपय वक्ता बता रहे थे कि इस बीच डेंगू से प्रभावित मरीजो की आमद बढ़ने लगी है।
यह स्थिति असनीसँकेत की ओर ईशारा कर रहा है।
वैसे भी पाकिस्तान की लचर व्यवस्था की बानगी यह है कि बाढ़ प्रभावित ईलाको की वास्तविक जमीनी हालात क्या है, किसी को ईल्म नही है।
बाढ़ से कितने जानमाल का नुकशान हुआ है, इसका कोई लेखाजोखा नही है।
सामान्य समय में ही पाकिस्तान की मूलभूत चिकित्सा व्यवस्था लचर है।
ऐसे में सैलाब के बाद दूरदराज अँचलो में सँभावित जल जनीत महामारी पर नियँत्रण की कितनी तैयारी होगी ? यह समझा जा सकता हो।
वैसे भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की प्रथम आवश्यकता ब्लीचिंग पावडर आदि जैसी चीजो की रहती है।
वर्तमान में पाकिस्तान सरकार की आर्थिक हालत बद से बदत्तर है। ऐसे में बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित अँचलो में कम्युनिटी सैनेटाइजेशन के लिये कितनी सक्षम होगी ? समझा जा सकता है।
पाकिस्तान को इस हालत तक पहुँचाने में वहाँ की भ्रष्ठ सेना के साथ शासन में रहे लोग जिम्मेदार है।
पाकिस्तान के सिंध और बलुचिस्तान जैसे अँचलो के लिये सैलाब कोई नयी चीज नही है।
जल सैलाब अमूमन हर वर्ष घटनेवाली प्राकृतिक घटना है।
ऐसे में जो प्रश्न स्वभाविक रुप से जहन में आता है कि आखिर पाकिस्तान की सरकार और उसकी सुपर सरकार सेना पिछले पच्चहत्तर वर्षो से क्या करती रही है?
हिमालय से बहकर पाकिस्तान में घुसनेवाली नदियाँ उसे दरियाओ का देश बनाती है।
बावजूद इसके पाकिस्तान के हुक्मरानो ने कभी जल प्रबँधन को प्राथमिकता में नही रखा।
न नदियो के जल प्रबँधन हेतु गँभीरता प्रदर्षित किया और न ही डिसास्टर मैनेजमेंट की अद्योसँरचना खड़ा किया।
विगत वर्षो में थोड़े बहुत छोटे या मझोले आकर के डैम या पूल पुलिया बना भी तो वह सब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।
वर्तमान के सैलाब के कारण अधिकाँश अद्योसँरचनाये मसलन डैम,पूल पुलिया, सड़के ढह गई है या फिर अनुपयोगी हो गई है।
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| Why and how devastating flood in Pakistan in hindi |
चोर चोर मौसेरे भाई-पाकिस्तान की बर्बादी के लिये चीन जिम्मेदार
कहावत है मौसेरे चोर चोर भाई...यह बात पाकिस्तान पर एकदम सटीक बैठती है।
भीख माँगने और भ्रष्टाचार कर भीख में मिली रकम को हड़पने की सँस्कृति वाले पाकिस्तान को साथी भी मिला है तो चोर चीन..!
आर्थिक विकास का सब्जबाग दिखाकर पाकिस्तान चाईना इकोनाँमिक काँरिडोर की आड़ में न सिर्फ पाकिस्तान को आर्थिक बोझ लाद दिया बल्कि आर्थिक गुलामी की ओर धकेल दिया है।
जल सैलाब ने चीन की कलई खोल दी है।
बदनियती और भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खड़ा किये गये CPEC प्रोजेक्ट जबरदस्त रुप से प्रभावित हुआ है।
एक जिम्मेदार पड़ौसी के नाते भारत के प्रधानमँत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष से बाढ़ को लेकर सँवेदना जताई है।
इस लेख को लिखे जाने तक भारत की ओर से कोई सहयोग नही गया है।
इसके पीछे सँभवत: पाकिस्तानी हुक्मरानो की कश्मीर के मुद्दे पर भारत से किसी प्रकार की व्यवसायिक तिजारत नही करने का निर्णय आड़े आता प्रतीत होता है।
भीख माँगने और भ्रष्टाचार कर भीख में मिली रकम को हड़पने की सँस्कृति वाले पाकिस्तान को साथी भी मिला है तो चोर चीन..!
आर्थिक विकास का सब्जबाग दिखाकर पाकिस्तान चाईना इकोनाँमिक काँरिडोर की आड़ में न सिर्फ पाकिस्तान को आर्थिक बोझ लाद दिया बल्कि आर्थिक गुलामी की ओर धकेल दिया है।
जल सैलाब ने चीन की कलई खोल दी है।
बदनियती और भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खड़ा किये गये CPEC प्रोजेक्ट जबरदस्त रुप से प्रभावित हुआ है।
एक जिम्मेदार पड़ौसी के नाते भारत के प्रधानमँत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष से बाढ़ को लेकर सँवेदना जताई है।
इस लेख को लिखे जाने तक भारत की ओर से कोई सहयोग नही गया है।
इसके पीछे सँभवत: पाकिस्तानी हुक्मरानो की कश्मीर के मुद्दे पर भारत से किसी प्रकार की व्यवसायिक तिजारत नही करने का निर्णय आड़े आता प्रतीत होता है।



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