आतँकवाद को लेकर भारत का पाकिस्तान और चीन पर कटाक्ष
सँयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतँकवाद निरोधी समिति (सीटीसी) की दो दिवसीय विशेष बैठक भारत में होना बड़ी बात है। 
2014 में नरेंद्र मोदी सरकार का रुख आतँकवाद के विरुध्द सख्त और स्पष्ठ रहा है।
भारत ने आठ वर्षो में दुनियाँ के अन्य देशो को यह समझाने में हद तक कामयाब रही है कि गुड टैरेरिज्म और बैड टैरेरिज्म जैसी कोई चीज नही होती है।
आतँकवाद सिर्फ और सिर्फ आतँकवाद होता है और आतँकवाद को हर स्तर पर कुचला जाना आवश्यक है।
आतँकवाद के विरुध्द वैश्विक स्तर पर रणनीति बनाने हेतु मँथन के लिए भारत को चुना जाना देश की नरेंद्र मोदी सरकार की उल्लेखनीय उपलब्धि है। सँयुक्त राष्ट्रसँघ की सुरक्षा सँबँधी समिति की बैठक वर्ष 2015 के बाद अमेरिका के न्यूयॉर्क से बाहर आयोजित हो रही है।यूएनएससी की आतँकवाद निरोधी समिति की बैठक न्यूयॉर्क स्थित हेडक्वार्टर से बाहर भारत में होना दर्शाता है कि आतँकवाद को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार की बातो को अब दुनियाँ गँभीरता से लेने लगी है। 
बैठक मुँबई और दिल्ली में आयोजित होगी.
इस बार बैठक का विषय 'आतँकवादी उद्देश्यों के लिए नई टेक्नोलॉजी के उपयोग का मुकाबला करना' है। 
बैठक का उद्देश्य इँटरनेट और सोशल मीडिया, वैश्विक आतँकी नेटवर्क के लिए फँडिंग और मानव रहित हवाई प्रणालियों का प्रसार, जैसे ड्रोन जैसी चुनौतियों से निबटने के तरीके ढूँढना है।
भारत में आयोजित बैठक से आतँकी मुल्क पाकिस्तान और आतँकवाद को सँरक्षण देनेवाले देश के तौर पर परिचित चीन को कड़ा सँदेश जायेगा।

आज बैठक को सँबोधित करते हुये भारत के विदेश मँत्री एस जयशँकर ने कहा है कि 26/11 के मुँबई आतँकवादी हमले का एक आतँकवादी को भारत ने जिंदा पकड़ा था, उस पर मुकदमा चलाया गया और उसे दोषी ठहराया गया. 

लेकिन 26/11 के हमलों के प्रमुख साजिशकर्ता और योजनाकार अभी भी सुरक्षित हैं। मँत्री ने कहा कि जब इनमें से कुछ पर प्रतिबँध लगाने की बात आती है तो सँयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद "राजनीतिक कारणों" के कारण कुछ आतँकवादियों पर मुकदमा चलाने में विफल रही है।