याद है अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म अँधा कानून का प्रसिद्ध सँवाद
जज साहब..पहले मेरे वो साल लौटाईये,
जो मेरी बेगुनाही ने आपके जेल में काटे है.
कुछ ऐसा ही हृदयस्पर्शी वाक्या प्रकाश में आया है. जो इँसानियत को झकझोर देता है.
घटना है मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के वारासिवनी निवासी आदिवासी गोंड युवा चन्द्रेश मर्शकोले और उसकी गर्लफ्रैंड श्रुति की है।
MBBS के अँतिम वर्ष के छात्र चन्द्रेश मर्शकोले की आँखो में जल्द डाक्टर बनने की थी ताकि जल्द जल्द अपना कैरियर बना सके और अपनी गर्लफ्रैंड के साथ जीवन की पारी शुरुआत कर सके।
जब चन्द्रेश के जीवन में सब कुछ बढ़िया चल रहा था कि तभी कुछ ऐसा घटित होता है कि जिसके चलते दो जीवन तबाह हो जाते है।
एक दिन चन्द्रेश की गर्लफ्रैंड श्रुति की रहस्यमयी परिस्थितियों में हत्या हो जाती है।
उस हत्याकाँड का आरोप MBBS के फाईनल ईयर के छात्र चन्द्रेश आ पड़ती है।
इस अप्रत्याशित घटना से चन्द्रेश के ख्वाबो के भावी जीवन चकनाचूर हो गया था।
अपनी गर्लफ्रेंड की हत्या के आरोप में एमबीबीएस छात्र चँद्रेश मार्सकोले ने 14 साल जेल के अँदर काटे दिये।
लम्बी कानूनी लड़ाई में 14 साल लग गये, तब पता चला कि जिस अपराध के लिये चन्द्रेश ने जेल में 4979 दिन बिताए हैं, उसने वह किया ही नहीं था।
अँतत: मप्र हाईकोर्ट ने चन्द्रेश को न सिर्फ आरोप से मुक्त किया बल्कि मध्यप्रदेश सरकार को मुआवजे के तौर पर 42 लाख रुपये का भुगतान का निर्देश दिया हैं।
लेकिन अब भी चन्द्रेश मर्शकोले का सँघर्ष खत्म नही हुआ है।
अब तक मप्र शासन के गृह विभाग ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन नही किया है और न ही चिकित्सा शिक्षा विभाग यह स्पष्ट कर पाया है कि वह एमबीबीएस फिर से शुरू कर सकता है या नहीं।
चन्द्रेश मर्शकोले अपना MBBS पूर्ण कर जीवन में आगे बढ़ना चाहता है जबकि सरकार न तो अब तक मुआवजा दे पाई है और न ही उसकी पढ़ाई के सँबँध में कोई निर्णय कर पाई है।
चन्द्रेश अब भी शासन से पूछ रहा है कि ..
पहले मेरे वो साल लौटाईये,
जो मेरी बेगुनाही ने आपके जेल में काटे है.
जज साहब..पहले मेरे वो साल लौटाईये,
जो मेरी बेगुनाही ने आपके जेल में काटे है.
कुछ ऐसा ही हृदयस्पर्शी वाक्या प्रकाश में आया है. जो इँसानियत को झकझोर देता है.
घटना है मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के वारासिवनी निवासी आदिवासी गोंड युवा चन्द्रेश मर्शकोले और उसकी गर्लफ्रैंड श्रुति की है।
MBBS के अँतिम वर्ष के छात्र चन्द्रेश मर्शकोले की आँखो में जल्द डाक्टर बनने की थी ताकि जल्द जल्द अपना कैरियर बना सके और अपनी गर्लफ्रैंड के साथ जीवन की पारी शुरुआत कर सके।
जब चन्द्रेश के जीवन में सब कुछ बढ़िया चल रहा था कि तभी कुछ ऐसा घटित होता है कि जिसके चलते दो जीवन तबाह हो जाते है।
एक दिन चन्द्रेश की गर्लफ्रैंड श्रुति की रहस्यमयी परिस्थितियों में हत्या हो जाती है।
उस हत्याकाँड का आरोप MBBS के फाईनल ईयर के छात्र चन्द्रेश आ पड़ती है।
इस अप्रत्याशित घटना से चन्द्रेश के ख्वाबो के भावी जीवन चकनाचूर हो गया था।
अपनी गर्लफ्रेंड की हत्या के आरोप में एमबीबीएस छात्र चँद्रेश मार्सकोले ने 14 साल जेल के अँदर काटे दिये।
लम्बी कानूनी लड़ाई में 14 साल लग गये, तब पता चला कि जिस अपराध के लिये चन्द्रेश ने जेल में 4979 दिन बिताए हैं, उसने वह किया ही नहीं था।
अँतत: मप्र हाईकोर्ट ने चन्द्रेश को न सिर्फ आरोप से मुक्त किया बल्कि मध्यप्रदेश सरकार को मुआवजे के तौर पर 42 लाख रुपये का भुगतान का निर्देश दिया हैं।
लेकिन अब भी चन्द्रेश मर्शकोले का सँघर्ष खत्म नही हुआ है।
अब तक मप्र शासन के गृह विभाग ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन नही किया है और न ही चिकित्सा शिक्षा विभाग यह स्पष्ट कर पाया है कि वह एमबीबीएस फिर से शुरू कर सकता है या नहीं।
चन्द्रेश मर्शकोले अपना MBBS पूर्ण कर जीवन में आगे बढ़ना चाहता है जबकि सरकार न तो अब तक मुआवजा दे पाई है और न ही उसकी पढ़ाई के सँबँध में कोई निर्णय कर पाई है।
चन्द्रेश अब भी शासन से पूछ रहा है कि ..
पहले मेरे वो साल लौटाईये,
जो मेरी बेगुनाही ने आपके जेल में काटे है.

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