जब वोटबैंक के लिये हो बदहवास.
यूँ ही विस्मृत किया जाता रहेगा इतिहास. 
# रोटी जले या हाथ...किसे फिकर है..!
यहाँ तो सारा ध्यान वोट बैंक की खिचड़ी पकाने में है.

छत्तीसगढ़ की काँग्रेस नित भुपेश बघेल सरकार ने अम्बिकापुर स्थित आकाशवाणी चौक का नाम बदलकर बाबा कार्तिक उराँव के नाम पर किये जाने का निर्णय कुछ ऐसा ही है.

लेकिन ऐसा करते हुये बघेल सरकार ने आकाशवाणी शब्द के पीछे के महत्व को समझने का जहमत नही उठाया है. 

भारत में सँचार क्राँति का द्योतक है
"आकाशवाणी " शब्द.
महात्मा गाँधी जिन्हे गुरुदेव से सँबोधित करते थे, राष्ट्रगीत जन गण मन...के जनक और महान स्वतँत्रता सँग्राम सेनानी कविगुरु रविन्द्रनाथ ठाकूर ने दिया था आकाशवाणी शब्द.

आकाशवाणी शब्द...गुलामी की बेड़ियों को तोड़कर स्वतँत्र हुये भारत की स्वतँत्र वाणी का द्योतक है.
लेकिन जिस ढँग से आकाशवाणी चौक का नाम बदला गया है, उससे स्पष्ठ होता है कि छत्तीसगढ़ की काँग्रेस नित भुपेश बघेल सरकार के लिये स्वतँत्र भारत की 

स्वतँत्र वाणी के परिचायक, महात्मा गाँधी की भावनाओं और कविगुरु रविन्द्रनाथ ठाकूर से युक्त स्मृति एवँ गरिमा का महत्व नही है.

भुपेश बघेल सरकार का आकाशवाणी चौक का नाम बदलने का निर्णय चुनावी वर्ष में वोटो के नफा नुकसान के दृष्टिगत वोटबैंक तुष्टिकरण का प्रयास है. 

मूल आदिवासियो और धर्मान्तरित आदिवासियों (ईसाई और इस्लाम) के मध्य उपजे स्थिति के अलावा अपने ही दल के भीतर विद्यमान परिस्थिति पर राजनीतिक  लाभ उठाने का प्रयास है.

आदिवासी नेता बाबा कार्तिक उराँव का सम्मान किया जाना आवश्यक है. लेकिन ऐसा करते हुये राष्ट्रीय भावना, महात्मा गाँधी की भावनाओं और  गुरुदेव विश्वगुरु रविन्द्रनाथ ठाकूर से जुड़ी स्मृति को मिटाना क्या उचित है ?