हवाई रुट से हाथ धोने के बाद बिलासपुर क्या अब बड़े वँदे भारत ट्रेन की कटौती झेलेगा ?
राज्य सत्ता की सक्रिय भूमिका में गत सात अप्रैल को बिलासपुर में बँद का आयोजन हुआ था.
मुद्दा था...बँद की गई हवाई रुट की बहाली एवँ हवाई अड्डे पर अतिरिक्त सुविधायें.
शहर की माँग के समर्थन में मैं भी दलगत भेद को भुलाकर बँद के समर्थन में था.
बहुत अधिक समय नही हुआ है जब प्रधानमँत्री नरेंद्र मोदी के देश के टियर थ्री,फोर स्तरीय शहरो को हवाई नक्शे पर लाने के सपने को मूर्तरुप देने हेतु केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मँत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बिलासपुर को देश के हवाई नक्शे पर उभरा था.
ऐसा कहते हुये मैं बिलासपुर के जागरुक जनो के योगदान को कम नही कर रहा हुँ.
जिन्होने सँघर्ष समिति के झण्डे तले हवाई सेवा की आवश्यकता को स्वर दिया है.
वर्तमान में स्थिति यह है कि बिलासपुर- इँदोर हवाई रुट बँद कर दिया गया है.
एविएशन कम्पनियाँ अमूमन ऐसा निर्णय रुट के कामर्शियली वाईबल नही होने पर उठाती है.
सँभवत: नियमित ट्राफिक नही मिलने की स्थिति में उक्त रुट बँद हुआ है.
अभी यह मुद्दा सुलझा भी नही है कि एक और सुविधा पर सँशय की तलवार लटक गई है.
आनेवाले समय में बिलासपुर से नागपुर के मध्य आठ डिब्बो वाली मिनी वन्दे भारत ट्रेन चलाने की सुगबुगाहट है.
जबकि वर्तमान में सोलह डिब्बोवाली बड़ी वन्दे भारत एक्सप्रेस ट्रेन बिलासपुर से नागपुर के मध्य सेवारत है.
यूँ तो अतिरिक्त नई ट्रेन मिलने की सुगबुगाहट से खुशी मिलना चाहिये.
लेकिन ऐसा है नही क्योंकि सुगबुगाहट में सँशय है.
दरअसल मिनी वन्दे भारत ट्रेन चलाने के निहित में सोच है कि अगर बड़ी वँदे भारत के लिये रुट कामर्शियली वाईबल नही हो तो छोटी वन्दे भारत ट्रेन सँचालित की जाय.
ऐसे में बिलासपुर-नागपुर के मध्य मिनीवन्दे भारत एक्सप्रेस की सँभावना क्या वर्तमान सँचालित हो रही बड़ी वँदे भारत एक्सप्रेस के कामर्शियली नान-वाईबल होने की ओर इँगित तो नही है.
चाहे हवाई रुट का बँद होना हो या फिर मिनी वँदे भारत ट्रेन की सँभावना से एक बात तो स्पष्ठ है कि बिलासपुर से अपेक्षित ट्राफिक का अभाव है.
किसी शहर से अगर कोई सुविधा बँद होती है या ऐसी कोई सँभावना बनती है तो यह शहर के लिये चिन्ता का कारण है.
बिलासपुर की कामर्शियल गतिविधियाँ हमेशा से राजधानी रायपुर की छाँया में रही है.
जिसका दुष्परिणाम शहर के विकास में परिलक्षित होता है.
हालाँकि जब भी बिलासपुर से किसी सार्वजनिक सुविधा की माँग उठती है,तो सँभावित बिजनेस के लिये एसईसीएल, बाल्को,एनटीपीसी जैसे व्यवसायिक सँस्थानो के साथ कोरबा,अम्बिकापुर, जाँजगीर चाँपा के प्रतिष्ठानो एवँ सामान्य ट्राफिक को गिना दिया जाता रहा है.
लेकिन वास्तव में ऐसा है क्या ?
तो इसका जवाब है नही..! क्योकि ऊपर उल्लेखित प्रतिष्ठानो एवँ पार्शवर्ती शहरो की ट्राफिक बिलासपुर की अपेक्षा रायपुर से यातायात करने में अधिक सहज महसूस करती है.
इस स्थिति के लिये बिलासपुर का बाजार और यहाँ का व्यवसायी वर्ग हद तक जिम्मेदार है.
बिलासपुर का बाजार कभी इतना परिपक्व नही बन पाया कि वह रायपुर बाजार का प्रतिस्पर्धी बन सके. परिणाम स्वरुप रायपुर
की छाँया से उबर नही सका.
यहाँ नियमित व्यावसायिक विजिटिंग ट्राफिक का न इनफल्कस है और न ही प्रत्युत आऊटवर्ड मूव्हमेंट है.
स्थिति का लब्बोलुआब यह कि आर्थिक प्रतिस्पर्धी दौर में सार्वजनिक सुविधाओं को राजनीतिक दबाव अथवा जन दबाव से कुछ समय के लिये तो हासिल करना तो सँभव है.
लेकिन उक्त सुविधाओं को कायम रखने के लिये शहर की स्वयँ की व्यवसायिक क्षमता में कन्सिसटेन्सी होना चाहिये.
खैर वर्तमान में सँशय यह है कि अगर मिलने जा रही है तो क्या मिनी वँदे भारत रेलगाड़ी बिलासपुर को अतिरिक्त सुविधा के तौर पर मिलेगी ?
या
फिर मिनी वँदे भारत एक्सप्रेस वर्तमान की में बड़ी वँदे भारत एक्सप्रेस का विकल्प होगी ?
मुद्दा था...बँद की गई हवाई रुट की बहाली एवँ हवाई अड्डे पर अतिरिक्त सुविधायें.
शहर की माँग के समर्थन में मैं भी दलगत भेद को भुलाकर बँद के समर्थन में था.
बहुत अधिक समय नही हुआ है जब प्रधानमँत्री नरेंद्र मोदी के देश के टियर थ्री,फोर स्तरीय शहरो को हवाई नक्शे पर लाने के सपने को मूर्तरुप देने हेतु केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मँत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बिलासपुर को देश के हवाई नक्शे पर उभरा था.
ऐसा कहते हुये मैं बिलासपुर के जागरुक जनो के योगदान को कम नही कर रहा हुँ.
जिन्होने सँघर्ष समिति के झण्डे तले हवाई सेवा की आवश्यकता को स्वर दिया है.
वर्तमान में स्थिति यह है कि बिलासपुर- इँदोर हवाई रुट बँद कर दिया गया है.
एविएशन कम्पनियाँ अमूमन ऐसा निर्णय रुट के कामर्शियली वाईबल नही होने पर उठाती है.
सँभवत: नियमित ट्राफिक नही मिलने की स्थिति में उक्त रुट बँद हुआ है.
अभी यह मुद्दा सुलझा भी नही है कि एक और सुविधा पर सँशय की तलवार लटक गई है.
आनेवाले समय में बिलासपुर से नागपुर के मध्य आठ डिब्बो वाली मिनी वन्दे भारत ट्रेन चलाने की सुगबुगाहट है.
जबकि वर्तमान में सोलह डिब्बोवाली बड़ी वन्दे भारत एक्सप्रेस ट्रेन बिलासपुर से नागपुर के मध्य सेवारत है.
यूँ तो अतिरिक्त नई ट्रेन मिलने की सुगबुगाहट से खुशी मिलना चाहिये.
लेकिन ऐसा है नही क्योंकि सुगबुगाहट में सँशय है.
दरअसल मिनी वन्दे भारत ट्रेन चलाने के निहित में सोच है कि अगर बड़ी वँदे भारत के लिये रुट कामर्शियली वाईबल नही हो तो छोटी वन्दे भारत ट्रेन सँचालित की जाय.
ऐसे में बिलासपुर-नागपुर के मध्य मिनीवन्दे भारत एक्सप्रेस की सँभावना क्या वर्तमान सँचालित हो रही बड़ी वँदे भारत एक्सप्रेस के कामर्शियली नान-वाईबल होने की ओर इँगित तो नही है.
चाहे हवाई रुट का बँद होना हो या फिर मिनी वँदे भारत ट्रेन की सँभावना से एक बात तो स्पष्ठ है कि बिलासपुर से अपेक्षित ट्राफिक का अभाव है.
किसी शहर से अगर कोई सुविधा बँद होती है या ऐसी कोई सँभावना बनती है तो यह शहर के लिये चिन्ता का कारण है.
बिलासपुर की कामर्शियल गतिविधियाँ हमेशा से राजधानी रायपुर की छाँया में रही है.
जिसका दुष्परिणाम शहर के विकास में परिलक्षित होता है.
हालाँकि जब भी बिलासपुर से किसी सार्वजनिक सुविधा की माँग उठती है,तो सँभावित बिजनेस के लिये एसईसीएल, बाल्को,एनटीपीसी जैसे व्यवसायिक सँस्थानो के साथ कोरबा,अम्बिकापुर, जाँजगीर चाँपा के प्रतिष्ठानो एवँ सामान्य ट्राफिक को गिना दिया जाता रहा है.
लेकिन वास्तव में ऐसा है क्या ?
तो इसका जवाब है नही..! क्योकि ऊपर उल्लेखित प्रतिष्ठानो एवँ पार्शवर्ती शहरो की ट्राफिक बिलासपुर की अपेक्षा रायपुर से यातायात करने में अधिक सहज महसूस करती है.
इस स्थिति के लिये बिलासपुर का बाजार और यहाँ का व्यवसायी वर्ग हद तक जिम्मेदार है.
बिलासपुर का बाजार कभी इतना परिपक्व नही बन पाया कि वह रायपुर बाजार का प्रतिस्पर्धी बन सके. परिणाम स्वरुप रायपुर
की छाँया से उबर नही सका.
यहाँ नियमित व्यावसायिक विजिटिंग ट्राफिक का न इनफल्कस है और न ही प्रत्युत आऊटवर्ड मूव्हमेंट है.
स्थिति का लब्बोलुआब यह कि आर्थिक प्रतिस्पर्धी दौर में सार्वजनिक सुविधाओं को राजनीतिक दबाव अथवा जन दबाव से कुछ समय के लिये तो हासिल करना तो सँभव है.
लेकिन उक्त सुविधाओं को कायम रखने के लिये शहर की स्वयँ की व्यवसायिक क्षमता में कन्सिसटेन्सी होना चाहिये.
खैर वर्तमान में सँशय यह है कि अगर मिलने जा रही है तो क्या मिनी वँदे भारत रेलगाड़ी बिलासपुर को अतिरिक्त सुविधा के तौर पर मिलेगी ?
या
फिर मिनी वँदे भारत एक्सप्रेस वर्तमान की में बड़ी वँदे भारत एक्सप्रेस का विकल्प होगी ?

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