अमृत तुल्य लाभ देता है यज्ञ-हवन.
प्राचीन काल से सनातन धर्म के वेद आदि धर्मग्रँथो एवँ ऋषि मुनियो ने हवन/यज्ञ का महत्व बताया है.
लेकिन यह देखने में आया है कि एक वर्ग
पर्यावरण की आड़ लेकर सनातन पूजन पध्दति हवन/यज्ञ पर नाक-भौ सिकोड़ते है. 
ऐसे नाक-भौ बनाने वाले तत्वो के मुँह पर इस दफे वैज्ञानिकों ने पुन: से  तमाचा जड़ा है. पुन: इसलिये क्योंकि कभी -
अमेरिका स्थित NASA के वैज्ञानिकों ने  यज्ञ के महत्व को स्वीकार है. 

जिन बातो को वैज्ञानिक लैब आदि की सुविधा के बगैर हजारों हजार वर्ष पूर्व हमारे पूर्वज ऋषि-मुनीगण स्थापित कर गये थे कि किस प्रकार यज्ञ/हवन से उठनेवाला धुआँ वातावरण  और परिवेष को शुध्द करता है एवँ हवन उपराँत बचे भस्म भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाता है. 

ऋषि मुनियों की उक्त बातों को वैज्ञानिक शोध सँस्था इँडियन काउँसिल ऑफ एग्रिकल्‍चरल रिसर्च (सँक्षेप ICAR)- सेंट्रल सॉयल सैलिनिटी रिसर्च इँस्‍टीट्यूट रीजनल रिसर्च स्‍टेशन के वैज्ञानिकों ने पुन: से सही साबित किया है.
वैज्ञानिकों ने हवन उपराँत वातावरण से हवा का सैम्पल और भस्म के सैम्पल की एनालिसिस कर ऋषि मुनियों की बातों की पुष्टि कर दिया है.
जहाँ हवन की भस्‍म में कैलशियम और मैग्‍नीशियम के साथ प्रचुर मात्रा में पोटैशियम मिला है। 

ये सभी तत्‍व जमीन की उर्वरता बढ़ाने के लिए जरूरी हैं। दरअसल,केमिकल फर्टिलाइजर्स में इन्‍हीं तत्‍वों का उपयोग कर उर्वरा शक्ति को बढ़ाया जाता है। 

उक्त रिपोर्ट से एक और खास बात सामने आई है,जो ऋषि मुनियों की बात को सही ठहराता है.
वैज्ञानिकों के अनुसार यज्ञ के बाद बैक्‍टीरिया और वायरस का लोड(उपस्थिति) हवा में कम होती है। 
माइक्रोबियल एनालिसिस स्थापित करती है कि हवन और यज्ञ के आधे घँटे बाद बैक्‍टीरियल और फँगल लोड हवा में घटता है। 
वैज्ञानिकों के रिपोर्ट में सबसे दिलचस्‍प बात यह है कि यज्ञ हो जाने के चार घँटे के बाद भी हवा में बैक्‍टीरियल और फँगल लोड में और कमी आ जाती है।
अनादि काल से हवन एवँ हवन उपराँत शेष बचे भस्‍म को लेकर ऋषि मुनियों कह गये है कि हवन बैक्‍टीरिया और वायरस को खत्‍म करता है। 
यही नहीं, इसकी शेष बचा भस्‍म खाद का काम कर सकती है। यह जमीन की उर्वरक शक्ति को कई गुणा बढ़ाती है। 
यज्ञ/हवन से प्राप्त भस्म का सेवन भी शरीर के लिये लाभदायक होता है. भस्म में पाये जानेवाले खनिज मानव शरीर के लिये उत्तम होते है. 

अब उक्त पौराणिक तथ्यो की पुष्टि करती साइँटिफिक रिपोर्ट आने से सनातन धर्म और उसके कर्म काण्डो की आलोचना करनेवालो के मुँह पर जोरदार तमाचा पड़ा है.
वैज्ञानिक रिपोर्ट के निष्‍कर्ष वाकई चौंकाने वाले हैं। हवन की भस्‍म में कैलशियम और मैग्‍नीशियम के साथ प्रचुर मात्रा में पोटैशियम की मौजूदगी हो या फिरक्षयज्ञ के धुँये से बैक्‍टीरिया और वायरस हवा में खत्म होना बताता है कि सनातन धर्म के ऋषि मुनि गण हजारो वर्षो पूर्व भी आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण सम्पन्न थे। 

वैज्ञानिकों की र‍िपोर्ट सनातन वैदिक कर्मकाँड पर सही होने की मुहर लगाती है।  ऋषि-मुनि‍ रोजाना हवन किया करते थे. हमें भी हवन या यज्ञ करने का कोई अवसर नही गवाना चाहिये.
यज्ञ के एकाधिक फायदे है.
पहला- आध्यात्मिक चेतना को उर्जा देता है.
दूसरा- वातावरण की शुध्दीकरता है.
तीसरा- मानव शरीर को पौष्टिकता प्रदान करता है.
चौथा- भूमि की उर्वरा शक्ति में वृध्दि करता है.