इँडियास ट्राँसफार्मेशन टू न्यू इँडिया

काँग्रेस नित मनमोहनसिंह शासन में भारत को दुनियाँ का बैक ऑफिस कहा जाने लगा था.
सस्ते मैनपावर के चलते दुनियाँ भर की कँपनियो के कॉल सेंटर्स का हब बन गया था.

2014 के परिवर्तन के बाद आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रम और मेक इन इँडिया नीति के सहारे PM नरेंद्र मोदी ने बैक आफिस की छवि को खत्म कर फ्रँट आफिस में बदलना आरम्भ किया था.

9 वर्षो में प्रतिवर्ष 15 लाख टैलेंटेड इँजिनियर्स देनेवाला भारत टेक्नोलॉजी,आटोमेशन,
एयरोस्पेस और ऑटोमोबाइल
आदि सेक्टर्स में धाक कायम की है।
जटिल डिजिटल तकनीक और एल्गोरिदम में भारतीयों की महारत हासिल की है.

दुनियाँ में डिजिटल टैलेंट का प्रमुख सोर्स बने भारत की स्थिति ये बन गई है कि आज भारतीय सॉफ्टवेयर के बिना दुनियाँ हिल नहीं सकती है। कहा जाय कि दुनियाँ भारत के सॉफ्टवेयर से दौड़ रही है,तो अतिशयोक्ति नहीं है.