माफी नहीं है काफी
मैटा या मार्क जुकरबर्ग तो है मोहरा.
अमेरिका की ? सॅस्था है चेहरा.

अमरिकी सहजता से नहीं लेते माफी.
हमें भी नहीं बैठना होगा माफी को 
मान काफी. 

ऊपर से दिखायेंगे दोस्ती और गहरा 
मेल. 
जबकि मोदी हटाओ के लक्ष्य के
साथ २९ के चुनावो तक भीतर से 
चलायेंगे नागरिक असॅतोष से लेकर 
चुनाव प्रभावित करने का खेल. 

नया भारत बन रहा है ग्लोबल.
कानून का दायरा भी होना चाहिए 
उस लेवल.

चुनाव आयोग सह गृह,वित्त और 
IT मंत्रालय को मिले बाहृय 
शक्तियो पर नियॅत्रण के प्रावधान.
जैसे विशेष अवसरो पर सोशल 
मीडिया पर सीमा ..? के बाद 
कंटेंट को माना जाय विज्ञापन. 
ताकि 
सम्यक  ज्ञात हो सके कि 
किस की रीच पर है नियॅत्रण.
और किस शक्ति को दे रहे अपरोक्ष
निमॅत्रण. 

विशेष अवसरो और सोशल मीडिया 
की भूमिका...पर जरुरी है गहन मॅथन.
जरुरी है समय रहते किया जाय कायदे-
कानूनो का ठोस प्रबॅधन.
उन्मुक्त सोशल मीडिया पर हो- चुनाव 
आयोग सह समस्त मंत्रालयो के प्रति 
जवाबदेही का बॅधन.