जिस पानी को दुनियाँ समझती रही खारा,
उस समुद्री जल से भारतीयो ने ढूँढ निकाला खजाना ढेर सारा
India's wonder- extracting 95% uranium from sea water - विज्ञान के क्षेत्र में सबसे बड़ी खोजो या आविष्कारो में शुमार किया जाय तो अनुचित नही होगा।
दुनियाँ में तेजी से घटती पारम्परिक उर्जा स्त्रोतो के दृष्टिगत रीन्यूएबल उर्जा स्त्रोतो का कितना महत्व है, सर्वविदित है।
आज समूची दुनियाँ किसी न किसी रुप में उर्जा आवश्यकताओ के मद्देनजर चिन्तशील है।
अक्षय उर्जा या रीन्यूएबल उर्जा के विभिन्न स्त्रोतो में से बात अगर युरेनियम की हो तब ?
यूरेनियम नाम ही काफी है...कान खड़ा करने के लिये !
चाहे फिर शाँतिपूर्ण उपयोग के लिये हो या फिर महाविनाशक न्यूक्लियर असले की चाहत रखनेवाली शक्तियाँ हो, सबकी चाहत है....युरेनियम !
प्रकृति का यह पदार्थ बहुत सीमित मात्रा में है।
लेकिन इसकी असीमित क्षमताओं से सभी वाकिफ है।
भारत भी इससे अक्षुता नही है। भारत में इसकी उपलब्धता सीमित है।
परमाणु या एटमिक क्षमता समपन्न देश होने के बावजूद भारत के लिये शाँतिपूर्ण उर्जा (विद्युत) उत्पादन हेतु युरेनियम बड़ी आवश्यकता है।
ऐसी स्थिति में देश में युरेनियम से सँबँधीत कोई आविष्कार हो तो ऐसा कौन होगा, जो गर्व का अनुभव नही करेगा ?
हाल ही में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवँ अनुसँधान सँस्थान पुणे के वैज्ञानिको ने आविष्कार कर ऐसा कारनामा कर दिखाया है कि समूची दुनियाँ हतप्रद हो गई है।
India's wonder- extracting 95% uranium from sea water
IISER Pune scientists successfully extract over 95% uranium from seawater.Estimated content of uranium the sea water is approximately 4 billion tonnes.
दुनियाँ भारत का लोहा मान रही है।
दरअसल आई आई एस ई आर पुणे के वैज्ञानिको ने बेशकीमती,अतिदुर्लभ और असीमित क्षमता सम्पन्न युरेनियम को समुद्र के जल से सफलतापूर्वक खोज निकाला है।
यही नही..सिर्फ खोजा हो तो ऐसा नही है। बल्कि समुद्र के खारे पानी से 95% युरेनियम सँशोधित कर (Extract) करने में सफलता हासिल कर ली है।
जिसके लिये अमेरिका, जापान, रुस,चीन जैसे से विज्ञान की दृष्टि से अतिउन्नत देश भी वर्षो से बाँट जोह रहे है।
उसे भारत के वैज्ञानिको ने सफलतापूर्वक कर दिखाया है।
इससे सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत के वैज्ञानिको के अथक परिश्रम के चलते कितना बड़ा और बेशकीमती सँपदा का भण्डार हाथ लगा है।
भयह भण्डार इतना बड़ा है कि भविष्य के भारत की तस्वीर और तकदीर, दोनो को हमेशा हमेशा के लिये बदलने की क्षमता रखता है।
फिलहाल इसकी नव आविष्कृत टैक्नोलॉजी की मदद से समुद्र के पानी से युरेनियम निकालने से सँबँधीत आर्थिक पक्ष पब्लिक डोमेन में नही होने के कारण कुछ कहना अनुचित होगा।
एक दफे इस नव आविष्कृत तकनीक की इकोनाँमिक फीजिबिलिटी का पक्ष से सँबँधीत जानकारी सार्वजनिक हो तब इस तकनीक के आर्थिक पक्ष पर चर्चा सँभव होगी।
हालाँकि इस सँबँध में कतिपय विशेषज्ञ की ओर से इँटरनेट में जानकारी उपलब्ध है। जिसकी चर्चा आगे करेंगे)
ये भी सँभव है कि चूँकि यूरेनियम से सँबँधीत जानकारियाँ अतिगोपनीयता की श्रेणी में होती है। अत: इस सँबँध में भारत सरकार की कोई नीति हो, जो आम जनमानस की जानकारी की परिधि से परे हो।
लेकिन एक राष्ट्रवादी भारतीय होने के नाते इतनी जानकारी पर्याप्त है कि हमारे आईआईएसईआर के कर्मठ वैज्ञानिकों ने समुद्र के खारे पानी से युरेनियम निकाल कर गर्व करने का अवसर प्रदान किया है।
यह अवसर है अपने वैज्ञानिको का धन्यवाद करने का है।
यह अवसर है प्रधानमँत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्ववाली विकासोन्मुखी सरकार को धन्यवाद करने का है।
नीतियो की सराहना करने का है।
भारत सरकार ने चँद वर्षो पूर्व जिस आविष्कार और नवाचार के प्रोत्साहन की नीतियो का बीजारोपण किया था।
वो अब सुफल देने लगे है।
दुनियाँ में तेजी से घटती पारम्परिक उर्जा स्त्रोतो के दृष्टिगत रीन्यूएबल उर्जा स्त्रोतो का कितना महत्व है, सर्वविदित है।
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| India's wonder- extracting 95% uranium from sea water |
आज समूची दुनियाँ किसी न किसी रुप में उर्जा आवश्यकताओ के मद्देनजर चिन्तशील है।
अक्षय उर्जा या रीन्यूएबल उर्जा के विभिन्न स्त्रोतो में से बात अगर युरेनियम की हो तब ?
यूरेनियम नाम ही काफी है...कान खड़ा करने के लिये !
चाहे फिर शाँतिपूर्ण उपयोग के लिये हो या फिर महाविनाशक न्यूक्लियर असले की चाहत रखनेवाली शक्तियाँ हो, सबकी चाहत है....युरेनियम !
प्रकृति का यह पदार्थ बहुत सीमित मात्रा में है।
लेकिन इसकी असीमित क्षमताओं से सभी वाकिफ है।
भारत भी इससे अक्षुता नही है। भारत में इसकी उपलब्धता सीमित है।
परमाणु या एटमिक क्षमता समपन्न देश होने के बावजूद भारत के लिये शाँतिपूर्ण उर्जा (विद्युत) उत्पादन हेतु युरेनियम बड़ी आवश्यकता है।
ऐसी स्थिति में देश में युरेनियम से सँबँधीत कोई आविष्कार हो तो ऐसा कौन होगा, जो गर्व का अनुभव नही करेगा ?
हाल ही में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवँ अनुसँधान सँस्थान पुणे के वैज्ञानिको ने आविष्कार कर ऐसा कारनामा कर दिखाया है कि समूची दुनियाँ हतप्रद हो गई है।
India's wonder- extracting 95% uranium from sea water
IISER Pune scientists successfully extract over 95% uranium from seawater.Estimated content of uranium the sea water is approximately 4 billion tonnes.
दुनियाँ भारत का लोहा मान रही है।
दरअसल आई आई एस ई आर पुणे के वैज्ञानिको ने बेशकीमती,अतिदुर्लभ और असीमित क्षमता सम्पन्न युरेनियम को समुद्र के जल से सफलतापूर्वक खोज निकाला है।
यही नही..सिर्फ खोजा हो तो ऐसा नही है। बल्कि समुद्र के खारे पानी से 95% युरेनियम सँशोधित कर (Extract) करने में सफलता हासिल कर ली है।
जिसके लिये अमेरिका, जापान, रुस,चीन जैसे से विज्ञान की दृष्टि से अतिउन्नत देश भी वर्षो से बाँट जोह रहे है।
उसे भारत के वैज्ञानिको ने सफलतापूर्वक कर दिखाया है।
समुद्र में यूरेनियम का अनुमानित भंडार
दुनियाँ का त्तीन भाग समुद्र है और उस विशाल समुद्र में वैज्ञानिक अनुमान के आधार पर लगभग 4 करोड़ टन युरेनियम का भण्डार है।इससे सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत के वैज्ञानिको के अथक परिश्रम के चलते कितना बड़ा और बेशकीमती सँपदा का भण्डार हाथ लगा है।
भयह भण्डार इतना बड़ा है कि भविष्य के भारत की तस्वीर और तकदीर, दोनो को हमेशा हमेशा के लिये बदलने की क्षमता रखता है।
फिलहाल इसकी नव आविष्कृत टैक्नोलॉजी की मदद से समुद्र के पानी से युरेनियम निकालने से सँबँधीत आर्थिक पक्ष पब्लिक डोमेन में नही होने के कारण कुछ कहना अनुचित होगा।
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| India's wonder- extracting 95% uranium from sea water |
एक दफे इस नव आविष्कृत तकनीक की इकोनाँमिक फीजिबिलिटी का पक्ष से सँबँधीत जानकारी सार्वजनिक हो तब इस तकनीक के आर्थिक पक्ष पर चर्चा सँभव होगी।
हालाँकि इस सँबँध में कतिपय विशेषज्ञ की ओर से इँटरनेट में जानकारी उपलब्ध है। जिसकी चर्चा आगे करेंगे)
ये भी सँभव है कि चूँकि यूरेनियम से सँबँधीत जानकारियाँ अतिगोपनीयता की श्रेणी में होती है। अत: इस सँबँध में भारत सरकार की कोई नीति हो, जो आम जनमानस की जानकारी की परिधि से परे हो।
लेकिन एक राष्ट्रवादी भारतीय होने के नाते इतनी जानकारी पर्याप्त है कि हमारे आईआईएसईआर के कर्मठ वैज्ञानिकों ने समुद्र के खारे पानी से युरेनियम निकाल कर गर्व करने का अवसर प्रदान किया है।
यह अवसर है अपने वैज्ञानिको का धन्यवाद करने का है।
यह अवसर है प्रधानमँत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्ववाली विकासोन्मुखी सरकार को धन्यवाद करने का है।
नीतियो की सराहना करने का है।
भारत सरकार ने चँद वर्षो पूर्व जिस आविष्कार और नवाचार के प्रोत्साहन की नीतियो का बीजारोपण किया था।
वो अब सुफल देने लगे है।
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Answer 1:- प्रारम्भिक तौर पर भारतीय अध्ययन के आधार पर समुद्र के पानी से 1किलोग्राम यूरेनियम निकालने हेतु $1000 अमेरिकी डालर का व्यय अनुमानित था।
लेकिन बाद के अध्ययनो एवँ परिष्कृत भारतीय वैज्ञानिक तकनीक के कारण यह लागत व्यय घटकर प्रति किलोग्राम $200 अमेरिकी डालर के लगभग ठहरी है।
Question 2:- क्या समुद्री जल से यूरेनियम निकाला जा सकता है?
Answer 2:- जी हाँ, समुद्र के जल से युरेनियम निकाला जा सकता है। यह आविष्कार भारत के पुणे स्थित सँस्थान IISER के वैज्ञानिको ने सफलतापूर्वक कर दिखाया है।
Question 3:- यूरेनियम कब तक खत्म हो जाएगा ?
Answer 3:- अध्ययनो के आधार पर वैश्विक स्तर पर युरेनियम की उपलब्धता सीमित है। वैश्विक आवश्यकता की दृष्टि से मात्र 80 वर्ष तक का भण्डार है।
FAQ
Question 1:- समुद्र के पानी से यूरेनियम निकालने में कितना खर्च आता है?Answer 1:- प्रारम्भिक तौर पर भारतीय अध्ययन के आधार पर समुद्र के पानी से 1किलोग्राम यूरेनियम निकालने हेतु $1000 अमेरिकी डालर का व्यय अनुमानित था।
लेकिन बाद के अध्ययनो एवँ परिष्कृत भारतीय वैज्ञानिक तकनीक के कारण यह लागत व्यय घटकर प्रति किलोग्राम $200 अमेरिकी डालर के लगभग ठहरी है।
Question 2:- क्या समुद्री जल से यूरेनियम निकाला जा सकता है?
Answer 2:- जी हाँ, समुद्र के जल से युरेनियम निकाला जा सकता है। यह आविष्कार भारत के पुणे स्थित सँस्थान IISER के वैज्ञानिको ने सफलतापूर्वक कर दिखाया है।
Question 3:- यूरेनियम कब तक खत्म हो जाएगा ?
Answer 3:- अध्ययनो के आधार पर वैश्विक स्तर पर युरेनियम की उपलब्धता सीमित है। वैश्विक आवश्यकता की दृष्टि से मात्र 80 वर्ष तक का भण्डार है।




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